Abstract
भारतीय राजनीति में जातीय समीकरण
Author : डाॅ० सुरेश कुमार
Abstract
भारतीय समाज जातीय सामाजिक इकाइयों से गठित और विभक्त है। श्रम विभाजनगत आनुवंशिक समूह भारतीय ग्राम की कृषि केन्द्रित व्यवस्था की विशेषता रही है। यहाँ की सामाजिक व्यवस्था में श्रमविभाजन संबन्धी विशेषीकरण जीवन के सभी अंगों में अनुस्यूत है। यह जातीय समूह एक ओर तो अपने आंतरिक संगठन से संचालित तथा नियमित है और दूसरी ओर उत्पादन सेवाओं के आदान-प्रदान और वस्तुओं के विनियम द्वारा परस्पर संबद्ध है। समान परम्परागत पेशा, समान धार्मिक विश्वास, प्रतीक, सामाजिक और धार्मिक प्रथाएंँ एवं व्यवहार, खानपान के नियम, जातीय अनुशासन और सजातीय विवाह इन जातीय समूह की आंतरिक एकता को स्थिर और दृढ़ करते हैं। इसके अतिरिक्त पूरे समाज की दृष्टि में प्रत्येक जाति का सोपानवत् सामाजिक संगठन में एक विशिष्ट स्थान व मर्यादा है जो इस सर्वमान्य धार्मिक विश्वास से पुष्ट है कि प्रत्येक मनुष्य की जाति तथा जातिगत धंधे दैवी विधान से निर्दिष्ट है और व्यापक दृष्टि के अन्य नियमों की भाँति प्रकृत तथा अटल हैं। प्रस्तुत पत्र भारतीय राजनीति में जातीय समीकरण को परिलक्षित करता है।
