Abstract
विकसित भारत के निर्माण में भारतीय ज्ञान प्रणाली की भूमिका
Author : शशि प्रभा गौतम एवं डाॅ दयाल शरन
Abstract
भारतीय ज्ञान प्रणाली भारत की प्राचीन बौद्धिक, वैज्ञानिक, दार्शनिक, शैक्षिक और सांस्कृतिक परंपराओं का समग्र स्वरूप है। इसमें वेद, उपनिषद, दर्शन, आयुर्वेद, योग, गणित, खगोल विज्ञान, कृषि विज्ञान, पर्यावरण ज्ञान तथा सामाजिक संगठन के सिद्धांत सम्मिलित हैं। वर्तमान समय में भारत “विकसित भारत 2047” के राष्ट्रीय लक्ष्य की ओर अग्रसर है। इस लक्ष्य की प्राप्ति केवल औद्योगिक और तकनीकी उन्नति से संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए ज्ञान, मूल्य, नैतिकता और सतत विकास आधारित दृष्टिकोण आवश्यक है। विकसित भारत का दृष्टिकोण भारत को आत्मनिर्भर, नवाचारी, समावेशी तथा वैश्विक नेतृत्व वाले राष्ट्र के रूप में स्थापित करने का लक्ष्य रखता है। भारतीय ज्ञान प्रणाली, जो प्राचीन परंपराओं, विज्ञान, दर्शन और स्वदेशी प्रथाओं पर आधारित है, सतत विकास के लिए एक सशक्त आधार प्रदान करती है। यह शोधपत्र आर्थिक विकास, शिक्षा सुधार, पर्यावरणीय स्थिरता, स्वास्थ्य सेवा, प्रौद्योगिकी तथा सामाजिक समरसता में भारतीय ज्ञान प्रणाली की भूमिका का विश्लेषण करता है। इसमें यह प्रतिपादित किया गया है कि पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण के समन्वय से भारत के विकसित राष्ट्र बनने की प्रक्रिया को तीव्र गति मिल सकती है।
