Abstract
विकसित भारत @ 2047: तथा राष्ट्र निर्माण में महिला सशक्तीकरण की केंद्रीय भूमिका
Author : श्रीमती सरला देवी चक्रवर्ती
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विकसित भारत 2047, देश को एक सशक्त और विकसित राष्ट्र बनाने के लिए भारत सरकार द्वारा शुरू किया जाने वाला सबसे महत्वपूर्ण अभियान है। जिसका प्रमुख उद्देश्य भारत को आर्थिक, सामाजिक और तकनीकी सुधार की ओर ले जाना है। सरकारी निकाय वंचित समूहों को मजबूत करने और महत्वपूर्ण सेवाओं तक उनकी पहुंच बढ़ाने का लक्ष्य रखते हैं। ग्रामीण भारत के सशक्तिकरण पर केंद्रित एक समग्र दृष्टिकोण, राष्ट्रीय विकास के उद्देश्यों और अंतर्राष्ट्रीय स्थिरता की प्रतिज्ञाओं के साथ संरेखित होता है, जो "विकसित भारत" की दृष्टि को साकार करने में इसके महत्व पर प्रकाश डालता है। इस पहल के लिए वर्ष 2047 को चुना गया है क्योंकि तभी भारत अपनी स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे करेगा। इस योजना का प्रमुख उद्देश्य देश में सभी के जीवन को बेहतर बनाना है, चाहे वह रोज़गार हो, या अच्छी शिक्षा, बात चिकित्सा सुविधाओं की हो या बेहतर बुनियादी ढाँचे से संबंधित हो। भारत जैसे देश में महिलाएं जो आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करती है उनके विकास को मायने प्रदान करते हुए श्रम बल भागीदारी को सही मायनों में अर्थव्यवस्था के विकास का इंजन कहा जाए तो अतिशयोक्ति नहीं होगी। भारतीय महिलाएं आज अपने भविष्य को लेकर पहले से कहीं अधिक सजक हुई हैं। वे कुप्रथाओं की बेड़ियां तोड़कर अपनी मेहनत के दम पर हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं। महिलाएं घर, बच्चों को संभालने के साथ-साथ नौकरी भी कर रही हैं। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि महिलाएं नेतृत्व और नई सोच के साथ 'विकसित भारत' के निर्माण में अहम भूमिका निभा रही हैं। महिला सशक्तिकरण समिति के सम्मेलन में उन्होंने संविधान सभा की 15 महिला सदस्यों के योगदान को भी याद किया। साथ ही कहा कि भारत ने शुरुआत से ही महिलाओं को वोट, समानता और न्याय का अधिकार दिया। उन्होंने कहा कि देश की महिलाएं अपने नेतृत्व और दृष्टिकोण से 'विकसित भारत' के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। साथ ही महिलाएं आज देश के विकास में नई सोच के साथ योगदान दे रही हैं और लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत कर रही हैं। जैसे-जैसे भारत अपनी स्वतंत्रता की 100वीं वर्षगाँठ, 2047 के करीब पहुँच रहा है, “विकसित भारत” की अवधारणा राष्ट्रीय चर्चा में अधिक प्रमुख हो गई है। विकसित भारत @2047 और महिला सशक्तिकरण" पर शोधपत्र में विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में महिला सशक्तिकरण के महत्व पर प्रकाश डाला गया है, जिसमें महिला नेतृत्व वाले विकास, आर्थिक भागीदारी, सामाजिक कल्याण और लैंगिक समानता को बढ़ावा देने वाली नीतियों जैसे विषयों को प्रमुखता मिल सकें। इस शोध पत्र का उद्देश्य महिला सशक्तिकरण को विकसित भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण स्तंभ के रूप में प्रस्तुत करना है। यह शोध पत्र इस दृष्टिकोण को साकार करने में महिलाओं को सशक्त बनाने के आवश्यक महत्व की खोज करता है। हालांकि महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है, फिर भी लैंगिक भेदभाव अभी भी मौजूद हैं, विशेषकर स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में। महिला सशक्तिकरण में सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक क्षेत्रों से संबंधित पहलू शामिल हैं। महिलाओं का सशक्तिकरण न केवल आवश्यक है, बल्कि एक देश के समग्र विकास के लिए भी अनिवार्य है।
