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विकसित भारत@2047 और महिला सशक्तिकरण : एक समाजशास्त्री अध्ययन

Author : डॉ. सीमा

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भारत के इतिहास में महिलाओं का नेतृत्व सदैव ही प्रेरणादायक रहा है उन्होंने अपने बुद्धिमता, साहस और दूरदृष्टि से दुनिया को एक नया स्वरूप प्रदान किया है चाहे वह सामाजिक क्षेत्र, राजनीति का क्षेत्र, शिक्षा का क्षेत्र या विज्ञान का क्षेत्र हो, महिलाओं ने अपनी योग्यता और कुशलता का सभी क्षेत्रों में अपना परचम लहराया है उनके योगदान को न केवल इतिहास में ही सम्मानित किया गया बल्कि वह भविष्य में आने वाली पीढ़ियों के लिए भी प्रेरणा बनी रहेगी और उनका नाम युगों - युगों तक याद किया जाएगा । महिला नेतृत्व से यह पता चलता है कि महिला सशक्तिकरण समाज को एक बेहतर भविष्य की ओर ले जा रहा है । प्राचीन काल से लेकर वर्तमान काल तक महिलाओं ने अपने अधिकारों, अपने राष्ट्र की प्रगति के लिए और समाज के कल्याण के लिए अनेक महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई है। हालांकि उन्हें पितृसत्तात्मक समाज, सामाजिक बाधाओं , सामाजिक कुरीतियों और सामाजिक भेदभाव का सामना भी करना पड़ा लेकिन उनके अद्वितीय साहस, नेतृत्व कौशल ने समाज में सदैव ही बदलाव लाने का मार्ग प्रशस्त किया हैं। सावित्रीबाई फुले, इंदिरा गांधी, झांसी की रानी लक्ष्मीबाई, रमाबाई और मदर टेरेसा महिलाओं का नाम आज बड़े ही गर्व से लिया जाता है। वर्तमान समय में भी अनेक महिलाओं ने स्वास्थ्य, अर्थव्यवस्था, राजनीति, शिक्षा और समाज सुधार में अनेक नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती हैं। हालांकि वर्तमान समय में भी महिलाओं के लिए अभी भी अनेक चुनौतियां बनी हुई है लेकिन महिला सशक्तिकरण के द्वारा महिलाओं ने दर्शाया है कि अगर जब भी महिलाओं को अवसर दिया जाए तो वह दुनिया को एक बेहतर दिशा में ले जा सकती हैं। वर्तमान में “सिंदूर मिशन” इसका सबसे बड़ा उदाहरण है जो विकसित भारत @ 2027 के लिए मील का पत्थर साबित हुआ हैं ।