Abstract

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परंपरागत आहार और मानसिक विकास: मध्य प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में आईकेएस-आधारित पोषण का एक अध्ययन

Author : डॉ साधना मंडलोई

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प्रस्तुत शोध पत्र मध्य प्रदेश के ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों में प्रचलित पारंपरिक आहार पद्धतियों और किशोरों के संज्ञानात्मक विकास (Cognitive Development) के बीच के अंतर्संबंधों का अन्वेषण करता है। भारतीय ज्ञान परंपरा (IKS) के प्राचीन सिद्धांत "जैसा अन्न, वैसा मन" को केंद्र में रखते हुए, यह अध्ययन विश्लेषण करता है कि कैसे स्थानीय स्तर पर उपलब्ध 'श्री अन्न' (मिलेट्स जैसे कोदो, कुटकी, रागी) और पारंपरिक सात्विक आहार किशोरों की मानसिक एकाग्रता, स्मृति और व्यवहारिक स्थिरता को प्रभावित करते हैं। अध्ययन के निष्कर्ष दर्शाते हैं कि मिलेट्स में मौजूद सूक्ष्म पोषक तत्व (आयरन, मैग्नीशियम और जिंक) न केवल शारीरिक कुपोषण और एनीमिया को दूर करने में सहायक हैं, बल्कि वे मस्तिष्क की कार्यप्रणाली और तंत्रिका तंत्र (Nervous System) को भी मजबूती प्रदान करते हैं। शोध यह भी रेखांकित करता है कि मध्य प्रदेश सरकार की 'देवारण्य योजना' और स्कूलों के मध्यान्ह भोजन में मिलेट्स का समावेश, आधुनिक स्वास्थ्य चुनौतियों का एक प्रभावी आईकेएस-आधारित समाधान पेश करता है। यह शोध अंततः यह सुझाव देता है कि शिक्षा और स्वास्थ्य प्रणालियों में पारंपरिक पोषण पद्धतियों का एकीकरण किशोरों के समग्र और संतुलित विकास के लिए अनिवार्य है।