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विकसित भारत @ 2047 में लघु एवं कुटीर उद्योगों की संभावनाएं एवं चुनौतियां: एक अध्ययन

Author : डॉ. पुन्ज भाष्कर

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यह शोध पत्र "विकसित भारत @ 2047" के विजन को साकार करने में लघु एवं कुटीर उद्योगों की निर्णायक भूमिका का विश्लेषण करता है, जिसका लक्ष्य भारत को $30 ट्रिलियन से $34.7 ट्रिलियन की विकसित अर्थव्यवस्था में बदलना है । वर्तमान में, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) भारत के सकल घरेलू उत्पाद में लगभग 30% और कुल निर्यात में 45% का योगदान देते हैं, जो 15 करोड़ से 25 करोड़ से अधिक लोगों की आजीविका का आधार हैं। अध्ययन इन उद्योगों के भविष्य के अवसरों का मूल्यांकन करता है, जिसमें गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस जैसे प्लेटफार्मों के माध्यम से डिजिटल एकीकरण, 'एक जिला एक उत्पाद' (ODOP) पहल के जरिए वैश्विक ब्रांडिंग, और नेट-जीरो 2070 प्रतिबद्धताओं को पूरा करने के लिए हरित विनिर्माण की ओर संक्रमण शामिल है । इन संभावनाओं के बावजूद, शोध ₹30 लाख करोड़ के ऋण अंतराल, पारंपरिक समूहों में तकनीकी अप्रचलन, और युवाओं के पलायन के कारण "लुप्त होती कलाओं" जैसी गंभीर चुनौतियों की पहचान करता है। शोध का निष्कर्ष है कि यद्यपि 'पीएम विश्वकर्मा' और 'PMEGP' जैसी योजनाएं लचीलापन बढ़ा रही हैं, लेकिन वित्तीय समावेशन और तकनीकी कौशल उन्नयन के लिए एक अधिक सुदृढ़ ढांचे की आवश्यकता है। इन उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मकता सुनिश्चित करना क्षेत्रीय असमानताओं को पाटने और भारत की स्वतंत्रता के शताब्दी वर्ष तक एक आत्मनिर्भर राष्ट्र के निर्माण के लिए अनिवार्य है ।