Abstract

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विकसित भारत @ 2047 में ग्रामीण विकास में नाबार्ड बैंक की भूमिका: एक अवलोकन

Author : डॉ. पूजा सिन्हा एवं राम सिंह

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'विकसित भारत @ 2047' का विजन भारत को स्वतंत्रता के शताब्दी वर्ष तक एक विकसित राष्ट्र में परिवर्तित करने का लक्ष्य रखता है, जिसमें समावेशी ग्रामीण विकास को एक अनिवार्य स्तंभ माना गया है। इस राष्ट्रीय उद्देश्य की प्राप्ति में नाबार्ड (राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक) की भूमिका एक केंद्रीय उत्प्रेरक और शीर्ष नियामक संस्थान के रूप में उभरती है। प्रस्तुत शोध पत्र ग्रामीण अर्थव्यवस्था के व्यापक रूपांतरण में नाबार्ड के रणनीतिक हस्तक्षेपों, वित्तीय मॉडलों और तकनीकी पहलों का विस्तृत अवलोकन प्रदान करता है। नाबार्ड अपनी पंचवर्षीय रणनीतिक योजना 'प्रगति 1.0' और 'उन्नति' जैसी पुनर्गठन पहलों के माध्यम से ग्रामीण बुनियादी ढांचे, डिजिटल समावेशन और संस्थागत दक्षता को सुदृढ़ कर रहा है। ग्रामीण अवसंरचना विकास निधि के तहत ₹8.2 लाख करोड़ के संचयी निवेश ने कृषि उत्पादकता और ग्रामीण कनेक्टिविटी को नई दिशा दी है। लेख में 63,000 प्राथमिक कृषि ऋण समितियों के कंप्यूटरीकरण, किसान उत्पादक संगठनों के सुदृढ़ीकरण और स्वयं सहायता समूह के माध्यम से महिला सशक्तिकरण के प्रभावों का विश्लेषण किया गया है। इसके अलावा, नाबार्ड 'एग्रीश्योर' फंड और जलवायु अनुकूलन परियोजनाओं के माध्यम से तकनीक-संचालित और हरित ग्रामीण भविष्य की नींव रख रहा है. निष्कर्षतः, विकसित भारत @ 2047 के विजन को साकार करने हेतु नाबार्ड की भूमिका एक पारंपरिक ऋणदाता से बदलकर एक 'डिजिटल-फर्स्ट' और सतत समाधान प्रदाता के रूप में विकसित हुई है।