Abstract

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भारत में वृद्धावस्था और विकास: एक समाजशास्त्रीय अध्ययन

Author : श्री महादेव सिंह

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वृद्धावस्था मानव जीवन का अंतिम चरण है, जो जैविक, सामाजिक तथा आर्थिक परिवर्तनों से जुड़ा होता है। भारत एक युवा देश माना जाता रहा है, किंतु वर्तमान में जनसंख्या संरचना में परिवर्तन के कारण वृद्धजन की संख्या तेजी से बढ़ रही है। अनुमान है कि 2050 तक भारत की लगभग 20% जनसंख्या 60 वर्ष से अधिक आयु की होगी। यह शोध-पत्र भारत में वृद्धावस्था की सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक तथा विकासात्मक स्थिति का समाजशास्त्रीय विश्लेषण प्रस्तुत करता है। इसमें वृद्धजन की समस्याएँ, नीतियाँ, परिवार संरचना में परिवर्तन तथा विकास और वृद्धावस्था के पारस्परिक संबंधों का अध्ययन किया गया है।