Abstract
डेयरी पशु-पोषण, स्वास्थ्य एवं प्रबन्धन – एक अध्ययन (जनपद शाहजहाँपुर के संदर्भ में)
Author : डा. कामरान हुसैन खाँ
Abstract
हमारे देश में कृषि भूमि पर बढ़ते हुए जनसंख्या के दबाव के कारण खाद्यान्न समस्या के समाधान के लिए अधिकांश कृषि योग्य भूमि में खाद्यान्न, तिलहन एवं दलहनी फसलों को उगाने की प्राथमिकता दी जा रही है। देश की कुल कृषि योग्य भूमि का केवल 4.4% अंश ही चारे की खेती में उपयोग किया जा रहा है जिसके माध्यम से देश के पशुओं को 45 से 60% हरे चारे की आवश्यकता की पूर्ति हो पा रही है। अतः हरे चारे की खेती के सीमित क्षेत्र में इसका प्रति हेक्टेअर उत्पादन बढ़ाकर ही इस कमी को कुछ सीमा तक पूरा किया जा सकता है। भारत में पशुओं का रखरखाव मुख्यतः कृषि सह-उत्पादों एवं जो कुछ थोड़ी बहुत चारागाह भूमि उपलब्ध होती है उसी पर निर्भर है। पशु पोषण वैज्ञानिकों का यह मत है कि इन शताब्दी के अन्त तक सूखे चारे की आवश्यकता आवश्यक रूप से अत्यधिक बढ़ सकती है, हरा चारा 70% से कम हो सकता है तथा प्रत्याशित आवश्यकता की आपूर्ति के लिए दानों के उत्पादन को लगभग 7 से 10 गुना बढ़ाना होगा। अतः स्पष्ट है कि देश में अनियन्त्रित गति से बढ़ रही जनसंख्या एवं पशु चारे की कमी के संकट के समाधान के लिए विशिष्ट उपाय करने होंगे।
