Abstract
विकसित भारत @2047 का मूल आधार भारतीय ज्ञान प्रणाली
Author : डॉ सी. पी. गुप्ता
Abstract
वर्तमान भारत सरकार, भारतीय अर्थशास्त्रियों तथा नीति निर्माताओं का एक संकल्प और योजना है की अपनी आज़ादी के 100 वें वर्ष में विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को प्राप्त किया जाए, अर्थात राष्ट्र को ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था के साथ-साथ वैज्ञानिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, स्वास्थ्यिक एवं नैतिक रूप से सशक्त, सक्षम, सर्वोत्तम और टिकाऊ बनाने की परिकल्पना है, यह शोध पत्र भारतीय ज्ञान प्रणाली (Bhartiya Knowledge System – BKS) के आलोक में उक्त लक्ष्यों की प्राप्ति भारतीय मूल्यों के बौद्धिक एवं व्यवहारिक दृष्टिकोण के रूप में विश्लेषित करता है। शोध पत्र का उद्देश्य यह अध्ययन करना है कि भारत अतीत में किस प्रकार अपने व्यवहारिक ज्ञान से अंतःविषयक एवं समग्र दृष्टिकोण, ज्ञान, नीति और व्यवहार के संयुक्त प्रयास के माध्यम से सोने की चिड़िया कहलाता था। वही नीति, नियत और दृष्टिकोण विकसित भारत@2047 के निर्माण में किस प्रकार से सहायक हो सकते हैं। प्रस्तुत शोध-पत्र में वर्णनात्मक, तुलनात्मक एवं विश्लेषणात्मक पद्धति का प्रयोग किया गया है। निष्कर्षतः यह स्पष्ट होता है कि BKS आधारित दृष्टिकोण ही भारत को सतत, समावेशी और मूल्यपरक विकास की दिशा में अग्रसर कर सकता है, और यह सब आयाम बिना भारतीय ज्ञान परंपरा के हासिल कर पाना संभव नहीं है, इसीलिए भारत सरकार ने भारतीय पृष्ठभूमि और यहां की मानसिक क्षमताओं के आधार पर भारत के विकास के लक्षित पहलुओं को पहचान कर, उन्हीं के साथ आगे बढ़ने का संकल्प लिया है। आजादी के बाद भारत ने पश्चिमी माडल पर अपने विकास के जो आयाम चुने थे, वे पर्यावरण और आब-ओ हवा के अनुकूल नहीं थे, तभी भारत एक निर्यातक राष्ट्र से उपभोक्तावादी राष्ट्र बन कर गया या यूं कहें कि विदेशी जलवायु के प्रतिकूल पौधे को भारतीय जलवायु और भूमि में आरोपित करने का बेबजह प्रयास किया जा रहा था जिसका असफल होना अवश्यसंभावी था।
