Abstract

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विकसित भारत के निर्माण में भारतीय ज्ञान प्रणाली की भूमिका

Author : डॉ० लक्ष्मी नारायण एवं अमर सिंह

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भारतीय ज्ञान प्रणाली केवल प्राचीन ग्रंथों तक सीमित कोई परंपरा नहीं है, बल्कि यह जीवन को समझने और व्यवस्थित करने की एक जीवंत पद्धति है। इसमें शिक्षा, स्वास्थ्य, प्रकृति, समाज और नैतिकता को एक-दूसरे से जुड़ा हुआ माना गया है। वेद, उपनिषद, योग, आयुर्वेद और प्राचीन गणितीय एवं वैज्ञानिक परंपराओं में ऐसा ज्ञान निहित है, जो आज भी मानवीय जीवन को संतुलित और सार्थक बनाने में सहायक हो सकता है। विकसित भारत के निर्माण की बात करें तो केवल आर्थिक प्रगति पर्याप्त नहीं है, बल्कि सामाजिक संतुलन, नैतिक चेतना और पर्यावरणीय संवेदनशीलता भी उतनी ही आवश्यक हैं। भारतीय ज्ञान प्रणाली इन सभी पहलुओं को एक साथ जोड़ने की क्षमता रखती है। यह व्यक्ति को केवल दक्ष नहीं बनाती, बल्कि जिम्मेदार और जागरूक नागरिक बनने की दिशा भी देती है। आज के समय में, जब तेजी से बदलती जीवनशैली कई चुनौतियाँ उत्पन्न कर रही है, भारतीय ज्ञान परंपरा एक स्थायी और संतुलित मार्ग प्रस्तुत करती है। इसलिए, आधुनिक शिक्षा और नीतियों में इसके समावेश से एक ऐसे भारत का निर्माण संभव है, जो विकास के साथ-साथ अपने मूल्यों और पहचान को भी सुरक्षित रख सके।