Abstract

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डॉ. आंबेडकर का महिला सशक्तिकरण का स्वप्न और विकसित भारत की दिशा

Author : श्रीमती रश्मि संत एवं प्रो० वंदना संत

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डॉ. भीमराव आंबेडकर भारतीय समाज के उन महान सुधारकों में से हैं जिन्होंने सामाजिक न्याय, समानता और मानवाधिकारों की अवधारणा को व्यवहारिक धरातल पर उतारने का प्रयास किया। उनकी विचारधारा समता, स्वतंत्रता और बन्धुत्व की भावना से प्रेरित थी। महिला सशक्तिकरण उनके चिंतन का केंद्रीय तत्व था। उनकी दृष्टि में महिला समाज की एक इकाई थी। महिलाओं को दरकिनार कर किसी भी देश का आर्थिक विकास संभव नहीं। इसीलिए उन्होंने महिला उत्थान का बीड़ा उठाते हुए महिला हित में हिन्दू कोड बिल पारित करने का प्रयास किया। तत्कालीन समाज भले ही उनके विरुद्ध हो किंतु उनके बाद धीरे धीरे लोग उनके विचारों से सहमत होने लगे। इसीलिए उनके नारी उद्धार और विकास की अवधारणा को समझते हुए तत्कालीन सरकार स्त्री को केंद्र में रखते हुए ही विकसित भारत का स्वप्न देख रही है। प्रस्तुत शोध लेख में डॉ. आंबेडकर के महिला सशक्तिकरण संबंधी विचारों, उनके सामाजिक-कानूनी प्रयासों तथा आज के ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य के साथ उनके दृष्टिकोण की प्रासंगिकता का विस्तृत विश्लेषण किया गया है।