Abstract
हिंदी साहित्य की राष्ट्रीय चेतना और राष्ट्रीय संकल्प: विकसित भारत @2047 के निर्माण में भूमिका
Author : डॉ. अंशु सत्यार्थी एवं श्वेता सिंह
Abstract
हिंदी साहित्य भारतीय समाज की आत्मा का सजीव दर्पण रहा है। इसमें निहित राष्ट्रीय चेतना ने स्वतंत्रता संग्राम से लेकर वर्तमान समय तक लोगों में देशप्रेम, त्याग और एकता की भावना को जागृत किया है। साहित्यकारों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से समाज को सही दिशा दिखाने का प्रयास किया और जनता को अपने कर्तव्यों के प्रति सजग बनाया। आज जब हम विकसित भारत @2047 के लक्ष्य की ओर अग्रसर हैं, तब हिंदी साहित्य की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। साहित्य समाज में नैतिक मूल्यों, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक गौरव को सुदृढ़ करता है। यह युवाओं के भीतर राष्ट्रीय संकल्प को मजबूत बनाता है तथा उन्हें राष्ट्रनिर्माण में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करता है। हिंदी साहित्य विज्ञान, शिक्षा, पर्यावरण और सामाजिक सुधार जैसे विषयों पर भी विचार प्रस्तुत करता है, जो विकसित भारत की आधारशिला हैं। इसके माध्यम से समाज में सकारात्मक सोच और उत्तरदायित्व की भावना विकसित होती है। इस प्रकार साहित्य केवल भावनात्मक अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य के निर्माण का सशक्त माध्यम है। हिंदी साहित्य की प्रेरणा से ही हम सशक्त, समृद्ध और आत्मनिर्भर भारत का सपना साकार कर सकते हैं।
