Abstract
विकसित भारत @ 2047ः परिकल्पना में आधी आबादी के स्वास्थ्य केे माध्यम से समावेशी विकास (विशेष अम्बेड़कर नगर जिले के सन्दर्भ में)
Author : डाॅ0 वालेन्तिना प्रिया
Abstract
आधी आबादी अर्थात महिलाएँ केवल जनसंख्या का हिस्सा नहीं बल्कि परिवार की पोषक, शिक्षिका, स्वास्थ्य संरक्षक और सामाजिक परिवर्तन की वाहक होती हैं। यदि महिलाएँ स्वस्थ होंगी तो परिवार स्वस्थ होगा, और स्वस्थ परिवार ही सशक्त राष्ट्र की नींव बनता है। आज भी भारत में महिलाओं को कुपोषण, एनीमिया, मातृत्व संबंधी जोखिम, मानसिक तनाव, घरेलू असमानता और सीमित स्वास्थ्य सेवाओं का सामना करना पड़ता है। ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों में यह स्थिति और गंभीर है। ऐसे में “समावेशी विकास” तभी संभव है जब स्वास्थ्य योजनाएँ केवल शहरी वर्ग तक सीमित न रहकर हर महिला तक पहुँचें। स्वास्थ्य केवल बीमारी से मुक्ति नहीं बल्कि शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और आर्थिक कल्याण की अवस्था है। महिला स्वास्थ्य में सुधार शिक्षा, रोजगार, निर्णय-सत्ता और सामाजिक समानता को भी मजबूत करता है। अंबेडकर नगर की अधिकांश महिला जनसंख्या ग्रामीण परिवेश में निवास करती है, जहाँ जीवन कृषि, श्रम और घरेलू जिम्मेदारियों के इर्द-गिर्द केंद्रित है। यहाँ महिला स्वास्थ्य पर आर्थिक सीमाओं के साथ-साथ सामाजिक परंपराओं का गहरा प्रभाव दिखाई देता है। पोषण संबंधी असंतुलन, एनीमिया, गर्भावस्था के दौरान अपर्याप्त चिकित्सकीय देखभाल और मानसिक स्वास्थ्य की उपेक्षा जैसी समस्याएँ व्यापक रूप से विद्यमान हैं।
