Abstract

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महिला सशक्तिकरण और समावेशी विकास (2047 तक लैंगिक समानता, सुरक्षा, भागीदारी और नेतृत्व सुनिश्चित करना)

Author : डॉ नीरज कुमार

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महिला सशक्तिकरण समावेशी और सतत विकास का मूल आधार है। भारत जब 2047 में अपनी स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूर्ण करेगा, तब राष्ट्र की वास्तविक प्रगति का मूल्यांकन इस बात से किया जाएगा कि समाज में महिलाओं को कितनी समानता, सुरक्षा, भागीदारी और नेतृत्व के अवसर प्राप्त हैं। यद्यपि भारतीय संविधान महिलाओं को समान अधिकार प्रदान करता है और सरकार द्वारा अनेक योजनाएँ संचालित की जा रही हैं, फिर भी व्यवहारिक स्तर पर महिलाएँ आज भी असमानता, असुरक्षा, आर्थिक निर्भरता और नेतृत्व में कम प्रतिनिधित्व जैसी समस्याओं से जूझ रही हैं। यह शोध-पत्र महिला सशक्तिकरण की अवधारणा, समावेशी विकास से उसके संबंध, भारत में महिलाओं की वर्तमान स्थिति, प्रमुख चुनौतियों तथा 2047 तक एक लैंगिक-समान और समावेशी भारत के निर्माण हेतु आवश्यक रणनीतियों का विस्तृत अध्ययन प्रस्तुत करता है।