Abstract

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डा0 अम्बेडकर का संघर्ष और सामाजिक न्याय

Author : डा0 सुरेश कुमार

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डॉ. भीमराव अम्बेडकर का जीवन संघर्ष, साहस और सामाजिक न्याय की अद्वितीय मिसाल है। उन्होंने जन्म से ही जातिगत भेदभाव, अपमान और वंचना का सामना किया, फिर भी शिक्षा को अपना सबसे सशक्त हथियार बनाया। कठिन परिस्थितियों में उच्च शिक्षा प्राप्त कर उन्होंने यह सिद्ध किया कि ज्ञान सामाजिक बंधनों को तोड़ने की क्षमता रखता है। अम्बेडकर ने केवल व्यक्तिगत उन्नति तक स्वयं को सीमित नहीं रखा, बल्कि समाज के सबसे वंचित वर्गों की आवाज़ बने। उन्होंने अस्पृश्यता, जाति- आधारित असमानता और सामाजिक अन्याय के विरुद्ध निरंतर संघर्ष किया। उनके आंदोलनों का उद्देश्य केवल अधिकारों की मांग नहीं था, बल्कि आत्मसम्मान, समान अवसर और मानवीय गरिमा की स्थापना भी था। संविधान निर्माण में उनकी भूमिका ऐतिहासिक रही, जहाँ उन्होंने समानता, स्वतंत्रता और बंधुत्व को लोकतंत्र की आधारशिला बनाया। अनुसूचित जातियों, जनजातियों और कमजोर वर्गों के लिए संवैधानिक संरक्षण उनके सामाजिक दृष्टिकोण का प्रमाण है। प्रस्तुत लेख डॉ. अम्बेडकर के संघर्ष को प्रदर्शित करता है कि सामाजिक न्याय केवल कानून से नहीं, बल्कि चेतना, शिक्षा और संगठन से साकार होता है। उनका विचार आज भी समाज को समता और न्याय की दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।